पोवारी भाषा की गाथा से सुंदर सुहानी।
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।
पोवारी या पोवारों की वाणी।
पोवारी भाषा से प्राचीन पुरानी।
देववाणी संस्कृत भाषा लक,
उद्भुत भयी से पोवारी वाणी।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी,
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।1।।
मालवा राजस्थान की भूमि।
पहले वहां पोवारी भाषा गूंजी।
मालवा की किसानी मा गू़ंजी।
मालवा की रणभूमि मा गूंजी।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी,
जसो हिमालय मा निर्झर बहतो पानी।।2।।
पोवारों की या मधुर मीठी वाणी।
समाज की संगाती छाया वानी।
मालवा राजस्थान की वाणी।
वोला भायेव वैनगंगा को पानी।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी,
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।3।।
मालवा लक आयी पोवारों की वाणी।
समाज को साथ आयी पोवारी वाणी।
वैनगंगा अंचल मा गूंज रही से वाणी।
खेती किसानी मा गूंज रही से वाणी।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी,
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।4।।
बालाघाट बरघाट अंचल मा
गूंज रही से पोवारों की मीठी वाणी।
विदर्भ की झाड़ी पट्टी मा
गूंज रही से पोवारो की मीठी वाणी।
गाथा येकी येकी मनोहारी सुंदर सुहानी,
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।5।।
नवयुग मा नवों प्रयासों लक
उन्नत होय रही से पोवारो की वाणी।
कहानी येकी ऐतिहासिक सुंदर सुहानी,
नायिका या पोवारी संस्कृति की।
संवाहिका या पोवारी संस्कृति की।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी,
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।6।।
हिन्दी दून प्राचीन आमरी वाणी।
हिन्दी की उपभाषा आमरी वाणी।
गूंज रही से सदियों पासून
अजरामर से पोवारों की वाणी।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी,
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।7।।
ईस्वी सन् 2018 मा
समाज मा आयी भाषिक क्रांति।
प्रेरक विचारों को कारण
मातृभाषा की दशा व दिशा बदली।
अजरामर से पोवारों की वाणी।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी।
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।8।।
पोवारी भाषा ला
श्रृंगारित होयके देखन।
आतुर सेती
मातृभाषा प्रेमियों का मन।
अजरामर से पोवारों की वाणी ।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी।
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।9।।
पोवारी साहित्य ला
नवीन ऊंचाई पर देखन।
आतुर सेती मातृभाषा प्रेमियों का मन।
अजरामर से पोवारों की वाणी।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी।
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।10।।
हिन्दी जगत मा
बढ़ाय रहीं से आपली पहचान।
पाय रही से हिन्दी मंचों पर सम्मान।
अजरामर से पोवारों की वाणी।
गाथा येकी मनोहारी सुंदर सुहानी।
जसो हिमालय मा निर्झर को बहतो पानी।।11।।
-ओ सी पटले
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