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पोवारी भाषा को एक रोचक परिचय

                
                                                         
                            देश की माटी को फूल पोवारी।
                                                                 
                            
संस्कृति को अनुकूल पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

निर्झर वानी पावन से पोवारी।
हवा वानी गतिमान से गोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

पोवारों की मातृभाषा पोवारी।
मधुर- मीठी भाषा से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

संस्कृत लक उद्भुत से पोवारी।
हिन्दी की एक उपभाषा पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

हिन्दी वानी सरल से पोवारी।
हिन्दी दून प्राचीन से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

मालवा मा पली बढ़ी से पोवारी।
वैनगंगा अंचल मा आयी पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

पोवार आती मालवा का निवासी।
आता वैनगंगा अंचल का निवासी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

वैनगंगा अंचल मा से पोवारी।
सतपुड़ा अंचल मा से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

सिवनी जिला मा से पोवारी।
बालाघाट जिला मा से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

गोंदिया जिला मा से पोवारी।
भंडारा जिला मा से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

लहान गांवों मा से पोवारी।
मोठो नगरों मा से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

एकच ठाट बाट की से पोवारी।
अलग अलग लहजा की पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

चेहरा- मोहरा जिनको गौरवर्णी।
आचार- विचार जिनको पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

ठाट-बाट जिनको पोवारी।
ताना- बाना जिनको पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

किसानों की वाणी से पोवारी।
ग्रामीण अंचल की से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

धर्म जिनको से सनातनी।
संस्कृति जिनकी से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

मातृभाषा से जिनकी पोवारी।
भारत माता से उनला सर्वोपरि।
माटी की खुशबू धारण करके ,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

सुशिक्षित भयेव समाज पोवारी।
नगरों मा छायेव समाज पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

परिष्कृत होय रही से पोवारी।
साहित्य मा ढल रही से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

हिन्दी मंचों पर गूंज रही से पोवारी।
सम्मानित भी होय रही से पोवारी ।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

ऊंचाई कर बढ़ रही से पोवारी।
नवो इतिहास गढ़ रही से पोवारी।
माटी की खुशबू धारण करके,
गूंज रही से मातृभाषा पोवारी।।

-ओ सी पटले
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46 मिनट पहले

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