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पितामह बंधे हैं अपने प्रतिज्ञा से

                
                                                         
                            पितामह बंधे हैं अपने प्रतिज्ञा से
                                                                 
                            
तुझे अंबा बन के जलना होगा
प्रतिशोध लेने के लिए
शिखंडी बन के पुनः जन्म लेना होगा ।
द्रोणाचार्य बंधे हैं अपने वचनों से
तुझे एकलव्य बनना होगा
अपना अंगूठा देकर उनका वादा निभाना होगा ।
कुन्ती बंधीं हुईं हैं अपने विवशता से
तुझे कर्ण बन के संघर्ष करना होगा
सूतपुत्र बन के अपना काबिलियत साबित करना होगा ।
धृतराष्ट्र डुबा हुआ है पुत्र मोह में
तुझे पांच पांडव बनकर वन में रहना होगा
अपने अधिकार और धर्म स्थापना के लिए
तुझे लड़ना होगा ।
कुरू राष्ट्र बंधा हुआ है अधर्म के हाथों
पांडवों बंधे हैं धर्म के साथ
सभा में ज्ञानी जनों बैठैं हैं मौन तो
तुझे द्रौपदी बन के लज्जा सहनि होगी
शायद श्री कृष्ण आ जाएं तेरी मान बचाने ।
शकुनी बंधा हुआ है अपने प्रतिशोध के साथ
दुर्योधन बंधा हुआ है अपने अंहकार के साथ
अधर्म बढ़ रहा है तीव्र गति से
तुझे देवकीनंदन बन के आना होगा
आर्यावर्त भरतखण्ड को अधर्मियों से मुक्ति दिलना होगा
तुझे धर्म स्थापना के लिए महाभारत युद्ध करना होगा
धर्म युद्ध में धर्म को फिर से समझाना होगा
पार्थ सारथी बन के जगत के लिए
उन्हें गीता ज्ञान तुझे देना होगा ।
तुझे यह सब करना हि होगा
क्यों कि तु परमात्मा की प्रकृति है
जिसके विधान से चलती है यह सृष्टि
जो कारण है सृष्टि, संतुलन और प्रलय का।
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9 घंटे पहले

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