धीर धर, धीर धर, लक्ष्य विकट तो बढ़,
लहर-लहर को चीरकर, आँधियों से लड़।
माटी की पुकार सुन, मातृ-ऋण को याद कर,
आज शौर्य की परीक्षा—स्वयं को तैयार कर।
ज्वाल-ज्वाल जल उठे, शंख-शंख बज उठे,
सोए हुए सिंह फिर हुंकार से जग उठे।
भगत की वो आग ले, आज़ाद का स्वाभिमान ले,
सुभाष की वो गर्जना, रग-रग में तूफान ले।
बारहठ की प्रतिज्ञा ले, सेठी की मशाल ले,
त्याग की तू राह चुन, सत्य की ढाल ले।
शीश झुके न देश का, ध्वज रुके न आसमान में,
प्राणों से भी श्रेष्ठ रख, भारत का सम्मान रे।
जाग-जाग, जाग-जाग, राष्ट्र की पुकार सुन,
वीरों के बलिदान की धड़कनों को आज चुन।
त्याग-त्याग दीप जले, शौर्य-शौर्य गूँज उठे,
भारत के सम्मान पर संकल्प सारे दृढ़ उठे।
उठ, उठ, उठ चल, मातृभूमि का मान रख,
वीरों की विरासत का हृदय में तू सम्मान रख।
रहे न कोई भय तुझे, रहे न कोई अभिमान पर,
शीश रहे ऊँचा सदा, भारत के सम्मान पर!
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