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तेरे लोट आने की आस

                
                                                         
                            तेरे न होने का इल्म आज मुझे सता रहा है,
                                                                 
                            
जैसे मेरी आँखें अँधेरे को चीरकर
तेरी एक झलक तलाश रही हों।

तेरे साथ बिताया गया हर एक वक्त,
लम्हों में बदलकर
आज भी तुझे पाने की कोशिश में लगा है।
तेरी बातें, तेरी यादें—
सब कुछ आज भी मेरे पास है,
बस तू नहीं है।

तूने क्या सितम किया है मुझ पर,
जो तुम्हें अपना बनाने में
मेरा सारा जीवन लग गया।
फिर भी न जाने क्यों,
इस टूटे हुए दिल को आज भी यक़ीन है
कि किसी मोड़ पर, किसी शाम,
तू फिर मेरे सामने आएगा।

शायद मेरी आँखों का यह इंतज़ार
कभी तो मुकम्मल होगा,
शायद तेरे कदमों की आहट
फिर मेरे दरवाज़े तक आएगी।

मैं आज भी वहीं खड़ा हूँ,
जहाँ तू मुझे छोड़कर गया था—
तेरी यादों को सीने से लगाए,
तेरे लौट आने की आस में।

क्योंकि मोहब्बत में सब कुछ खोकर भी
एक उम्मीद बची रहती है—
कि जिसे दिल ने सच्चे मन से चाहा हो,
वह एक दिन लौटकर ज़रूर आता है।
 
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2 महीने पहले

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