आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जिसे भूलना था... वही ज़िंदगी बन गया

                
                                                         
                            कहते हैं,
                                                                 
                            
समय हर दर्द को कम कर देता है।
शायद उन्होंने कभी
सच्ची मोहब्बत नहीं की होगी।

मैंने तुम्हें भुलाने के लिए
हर रास्ता बदल लिया,
हर आदत छोड़ दी,
हर ख़्वाब जला दिया...
लेकिन तुम्हारी याद ने
मेरा हर नया रास्ता पहचान लिया।

अब तो हाल ये है कि
तुम्हारा नाम भी नहीं लेता,
फिर भी हर दुआ
अनजाने में तुम्हारे लिए निकल जाती है।

तुम्हारे बिना जीना
ऐसा है जैसे
कोई नदी समंदर तक पहुँचे ही नहीं,
कोई दीपक पूरी रात
जलता रहे,
पर उसके हिस्से की सुबह
कभी न आए।

तुम शायद खुश हो...
और यही सोचकर
मैं अपने आँसू छिपा लेता हूँ।
क्योंकि मोहब्बत अगर सच्ची हो,
तो शिकायत नहीं करती—
बस चुपचाप टूटती रहती है।

एक दिन मेरी धड़कनें
थक जाएँगी,
मेरी आँखें हमेशा के लिए
बंद हो जाएँगी।
उस दिन अगर मेरी कोई आख़िरी इच्छा पूछी जाए,
तो मैं बस इतना कहूँगा—

"मुझे उसी रास्ते पर सुला देना,
जहाँ से कभी वह गुज़री थी...
शायद उसकी एक आहट
मेरी रूह को सुकून दे दे।"

क्योंकि कुछ लोग
ज़िंदगी में नहीं मिलते,
फिर भी पूरी ज़िंदगी
उन्हीं के नाम लिखी जाती है।
— हेम
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर