मैंने पूछा ज़िन्दगी क्या है
एक आवाज आई
जैसे पानी की एक बूंद का
दरिया में मिलना
और दरिया का कहीं दूर
समुद्र में मिल जाना है
उसी तरह ज़िन्दगी का भी
पहले एक शरीर को धारण करना
फिर इस दुनिया से मिलना
और अंत मे फिर उसी दुनिया में चले जाना
जहां से ज़िन्दगी की शुरुआत हुई थी
यहीं ज़िन्दगी है
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