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अंशुमाली....

                
                                                         
                            जिस बगियाँ के तुम फूल हों
                                                                 
                            
वो बागान कितना सुन्दर होगा...
फिजाओं मे जब तुम्हारी ख़ुशबू
फैलती होंगी...
सारी फिज़ाए चहक उठा होगा
काश उस बगियाँ मे कलि बनकर
मै आऊं भौरा भी हम दोनों को साथ
देख कर मुस्कुराया होगा...
अनुमति ले लो उस बगियाँ के माली से
हमें अपने बागान की शेहजादी बनाए
इसे सुनकर फूल भी इतराया होगा...
उनकी बगियाँ के तुम एक फूल अनमोल
हों तुझे देख कर मृग भी नाचा होगा ...
मैं बन जाऊ उनके दिल की युवराज्ञी ले ले
वों मुझे ममता के गोंद मे हम पर भी वो प्यार
लुटाए ओ मेरे अंशुमाली जैसे तुम मेरे सार्थक
मै तुम्हारी साथी...
खुदा भी हमें साथ देखकर मुस्कुराया होगा
जैसे अंशुमाली...!!
- हेमप्रिया
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2 महीने पहले

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