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चाहत का सिलसिला

                
                                                         
                            चाहू भी तो में तुझे कैसे
                                                                 
                            
तू मेरे दिल में है नसीब में नहीं
तुझे देना चाहूं में हर एक खुशी
पर तेरी वो बेवफाई जो मुझे याद आ जाए
सर पर लकीर की सिलवाते जो तू दे गई
वो मुझे याद आ जाए
तू मिले किसी चौराहा पर
में तुझे देखूं बस नज़र न आओ तुझे
नज़र जो आओ तो तुझे तेरी बेवफाई याद आ जाए
तू यू घूम के नजर अंदाज करे मुझे
मेरी आंख भर आ जाए पल भर में
में चाहूं भी तो तुझे कैसे
तू मेरे दिल में है नसीब में नहीं
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एक घंटा पहले

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