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पुद्गलों के पीछे कितनी दौड़ लगाओगे

                
                                                         
                            पुद्गलों के पीछे कितनी दौड़ लगाओगे,
                                                                 
                            
नश्वर होंगे जो एक दिन, उनके पीछे कितना भागोगे?
आडंबर बढ़ता जा रहा, आराधना घटती जा रही,
जिंदगी यह विषयों में बहती जा रही।
काल के सामने सब नतमस्तक हो जाते,
बने-बनाए महल यही धरे रह जाते।
पुद्गल के पीछे नहीं, परमात्मा के पीछे भागो,
ताकि सिद्ध-बुद्ध-मुक्त बन सको आगे।
भूल पे भूल कब तक दोहराते रहोगे...
— नश्वर होंगे जो एक दिन...
अनंत बार नारकी बन हमने इसकी सजा भोगी,
फिर भी हमारी आत्मा अब तक नहीं जागी।
परिणाम कभी सोचा है, ऐसा करने पर क्या आएगा?
पुद्गलों के पीछे भागने पर आखिरकार क्या मिलेगा?
पुद्गल का तो स्वभाव ही है सड़ना-गलना,
सड़कर, गलकर एक दिन नष्ट हो जाना।
अनंत समय नहीं, अब अल्प समय ही बचा है,
जगा लो अपनी आत्मा, मोक्ष सामने ही खड़ा है।
'हर्षित' किंतु कब तक इससे नज़रें चुराओगे...
— नश्वर होंगे जो एक दिन...
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2 महीने पहले

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