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मिल जाए बोधि

                
                                                         
                            मृत्यु से पहले हे प्रभु! मिल जाए आपकी बोधि,
                                                                 
                            
ताकि अंत समय पर रहे मेरी समाधि।
आपका ज्ञान मिलेगा तो पंडित संसारी बनेंगे,
शीघ्र-अतिशीघ्र हम भी मोक्षवासी होंगे।
आपके वचन से सार्थक होंगी श्वासें,
चल पड़े कदम फिर साधना के वास्ते।
आपकी शरण में मिलेगी सुमति की पनाह,
निःसंदेह आपकी कृपा से होगी सुख की राह।
आपकी ज्ञान-सरिता से दूर होगी सर्व-व्याधि...

सुख अथाह संसार में ढूँढने की खूब कोशिश की,
किंतु हर बार, हर जगह निराशा ही प्राप्त हुई।
व्यक्ति या वस्तु, सब कुछ है अस्थिर,
एकमात्र आपकी चरण-शरण है स्थिर।
वैरागी मन हो जाए मरण से पहले,
ताकि फिरना ना पड़े चौरासी के मेले।
यह ज्ञान का वरदान आपसे ही मिल सकता,
मोक्ष का यह साधन आपसे ही पा सकता।
'हर्षित' कर्म क्षय करके मिलेगी सिद्धपद की उपाधि...
 
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3 महीने पहले

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