आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मन को एकाग्र करना

                
                                                         
                            मन को एकाग्र करना बहुत है ज़रूरी,
                                                                 
                            
क्योंकि इसके बिना मोक्ष में कोसों दूरी।
एकाग्र मन से ही सफलता मिलती,
बीज एकाग्र न हो तो कलियाँ नहीं खिलती।
भटकता मन सदैव अहित का कारण,
स्थिर मन से होता सम्यक्त्व धारण।
अनंत समय गुज़ारा मन एकाग्र न होने के कारण,
मिली सिद्धशिला अनंतों को मन एकाग्र करने के कारण।
एकाग्र मन से पूर्ण होती हर इच्छा अधूरी...
— मन को एकाग्र करना...
मन एकाग्र न हो तो ब्रेन हैमरेज हो जाता,
भटकता मन कभी भी मंज़िल नहीं पाता।
ज़्यादा सोचने से ही बीमारी घर आती,
मन शांत हो तो बड़ी से बड़ी बीमारी टलती।
अदीन मन है सुख का साधन,
एक यही है शाश्वत मोक्ष का कारण।
जानते हम सब, किंतु उपयोग नहीं लगाते,
उपयोग लगाते हैं तो भी विपरीत लगाते।
'हर्षित' एकाग्र मन ही है मुक्तिसुख की धुरी...
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर