जिन्होंने अपनी साधना से कषायों को मंद किया,
तप-अग्नि में तपकर स्वयं को निर्मल बनाया।
धन्य है उनकी आत्मा को, करते शत-शत वंदन,
जिनके चरणों की माटी होती पावन-चंदन।
हर श्वास में सुमिरन जिनका, हर क्षण भाव उनका,
निष्पाप है मन जिनका, अमृत-सा वचन उनका।
प्रकाश-पुंज बन अंधकार जिसने मिटाया,
भूले-भटके हम जैसों को सत्य मार्ग दिखाया।
कुशल वचनों से कितनों को कुशल बनाया...
एकाग्रता जिनकी शिखर को छूती है,
जिनकी शरण में बिगड़ी बात बनती है।
विषयों की आशा नहीं, साम्य-भाव धन रखते हैं,
निज-पर के हित साधन में जो निशदिन तत्पर रहते हैं।
स्वार्थ-त्याग की कठिन तपस्या बिना खेद जो करते हैं,
ऐसे गुरुवर मेरे जो जन-जन को तारते हैं।
है अपार महिमा, शब्दों में नहीं बाँध सकते,
गुरु गोविंद से भी बड़े, यह सब शास्त्र-ग्रंथ कहते।
'हर्षित ' सौभाग्य है हमारा जो हमने आशीष पाया...
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