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चार कषाय

                
                                                         
                            चार कषायों से ज़रूर बचकर रहना,
                                                                 
                            
महापुरुषों का प्रायः यही तो है कहना।
चार कषायों में क्रोध की नरक में प्रधानता,
बाकी तीन कषायों की आंशिक ही प्रधानता।
तिर्यंच गति में माया की प्रधानता,
पग-पग पर मायावीपन नज़र आता।
अति क्रोध के कारण ही तो नरक में जाते,
तिर्यंच योनि में माया के कारण ही जन्मते।
चार कषायों की प्रधानता चार गति से समझना...

मान की प्रधानता मनुष्य में कितनी?
सागर में जलधारा है जितनी।
हर कदम मान में फूला नहीं समा रहा,
'मेरेपन' के कारण ही भटकता जा रहा।
लोभ देखो देवों में कितना भरमाया,
इतना होने पर भी और पाने को ललचाया।
देव होने पर भी दीनता दिखाते,
इसी कारण ही तो वे तर नहीं पाते।
'हर्षित' अधिक जानना हो तो भगवती पढ़ना
 
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3 महीने पहले

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