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दिल-ए-नादान

                
                                                         
                            हसरत-ए-दीद आपकी करती हमे हैरान है
                                                                 
                            
  मुलाक़ात हो दोबारा यही अरमान है

देख कर आपको छलकती है निगाहों में ताबिश
  आपसे मिलाकर जिंदगी ने किया एहसान है

दिल-ए-चाहे आपका हात थामकर गुज़रे हर शाम
उफsss.... यु ही ख़्वाब बुनता दिल-ए-नादान है

ना हो बात कभी तो लगता ख़सारा है कोई
आपके साथ होने से  जिंदगी लगती आसान है

अहल-ए-दिल फक़त आप  हम-नफ़स लगती है
   आपके सिवा अब सभी लगते अंजान है

     अक्सर कुछ याद रहता नही हमे मगर
      आपको भूलने का ना कोई इम्कान है

- हर्षदा डोंगरे
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2 महीने पहले

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