हसरत-ए-दीद आपकी करती हमे हैरान है
मुलाक़ात हो दोबारा यही अरमान है
देख कर आपको छलकती है निगाहों में ताबिश
आपसे मिलाकर जिंदगी ने किया एहसान है
दिल-ए-चाहे आपका हात थामकर गुज़रे हर शाम
उफsss.... यु ही ख़्वाब बुनता दिल-ए-नादान है
ना हो बात कभी तो लगता ख़सारा है कोई
आपके साथ होने से जिंदगी लगती आसान है
अहल-ए-दिल फक़त आप हम-नफ़स लगती है
आपके सिवा अब सभी लगते अंजान है
अक्सर कुछ याद रहता नही हमे मगर
आपको भूलने का ना कोई इम्कान है
- हर्षदा डोंगरे
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