कायनात-ए-इश्क़
हवाओं पे हम नाम तेरा लिख आए हैं,
हम इश्क़ की हर हद को पार कर आए हैं!
फ़िज़ाओं में जो बिखरी हैं ज़ुल्फ़ें तुम्हारी,
हम अपनी पूरी कायनात उन पे हार आए हैं!
-हरिओम सोनू
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