करुणा की निर्मल धारा से, सब पापों को हर लेती है,
जो ध्याए सच्चे भावों से, माँ खाली झोली भरती है।
यह पावन नौ रातों का मेला, हर दिल में जोश जगाता है,
माँ के चरणों में शीश झुका, जग सारा आशीष पाता है!
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