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मेरे अल्फाज़

गांव की लड़की

Harikesh Yadav

38 कविताएं

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वह गांव की एक लड़की है
पुरानी परंपराओं की भेंट चढ़ी है
सोचती वही है वो जो उसको सोचना सिखाया गया है
वह प्यार तो करना चाहती है
पर परंपराओं के पीछे रह कर
वह पढ़ना तो चाहती है
पर परंपराओं के पीछे रह कर
वह साहित्य में प्यार लिखना तो चाहती है
पर परंपराओं के पीछे रह कर
वह अपनी मनुवादी संस्कृति को ही अपनी सीमाएं समझती है
वह आज़ादी चाहती है
वह चेतना चाहती है
वह नए युग की शुरुआत करना चाहती है
वह प्यार को नए सिरे से परिभाषित करना चाहती है ।

हरिकेश यादव , बी एच यू


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