(जीवन सफल बनाना है)
ओ जीवन के अर्थ,
हे अस्तित्व मत हो व्यर्थ।
तुझे समर्थ बनना है,
जीवन सफल बनाना है।
वंदना देव की नहीं,
मनुज की कर।
दुर्बलता का बल बनकर,
सत्कृत मानव कर।
आंधी-तूफां आए चाहे
पथ से तू पीछे न हट।
चाहे दीप जले न मंदिर,
पर जले दीन की चौखट।
जो दिखता,सब नश्वर है,
मन की आंखें देखे ईश्वर है।
बूंद का धर्म बिखरना है,
जीवन सफल बनाना है।।
-हरि मोहन जांगिड़
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