तोहफे में तोहफा, कुछ कमाल मिला है,
कि इंसान की पहचान बेमिसाल मिला है।
जिस का ख्याल भी मेरे ख्याल मे नहीं है
उसी सख्श से कुछ ऐसा सवाल मिला है।
किरदार से ही होती है पहचान जहाँ पर,
वहां सूरत से फिर कोई बदहाल मिला है।
हम तो किसी और दुनिया में उलझे हुए हैं,
पर ये कुछ नया बुना हुआ जाल मिला हैं।
वक्त से पहले 'धीरज' खोना भी ठीक नहीं
ईमान के कच्चे को कहाँ कुछ कमाल मिला है
पहले भी तो चुकाई है कीमत इन तोहफों की
'राहुल' कौन सा तुमको ये इसी साल मिला है।
~राहुल वर्मा
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