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कोशिश हमेशा से रही, अच्छा लिखूं हर हाल में

                
                                                         
                            जो बात है दिल मे मेरे, शब्दों में ढ़ाल देता हूँ
                                                                 
                            
कभी-कभी तो दिल ही, पन्नों पर निकाल देता हूँ

कोशिश हमेशा से रही, अच्छा लिखूं हर हाल में
इसलिए हर शब्दों को, पहले ही खंगाल लेता हूँ

पढ़ने वक्त हर शब्दों का, वजूद दिखे..दाद मिले,
भूल चूक को भी मै, चंद शब्दों से संभाल लेता हूँ।

उलझन हुई जब भी, कि उनका लिखूं- अपना लिखूं
कलम उठाने से पहले फिर, सिक्का उछाल लेता हूँ।

किरदार भी ऊंचा रहे और लब्ज़ मे नरमी भी हो
उनको बेअदबी से मै, कुछ ऐसी मिसाल देता हूँ।

'राहुल' कलम की खुमारी मशहूर ना कर दे उन्हें
फिर सारा जिम्मा मैं अपने उपर ही डाल लेता हूँ।
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3 महीने पहले

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