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बस्ती बंजारों की हो गई

                
                                                         
                            नहीं बचाई
                                                                 
                            
कश्ती तूने
बस्ती बंजारों की
हो गई
मिला दिए हस्ती
मिट्टी में
बस्ती बंजारों की
हो गई।
कहाँ गया?
बगियाँ का माली
आज खजाना
अब है खाली
क्यों बजाएं
हम सब थाली?
सिसक रही हैं
भारत माता
बच्चों की क्या
हालत हो गई।
बस्ती बंजारों
की हो गई।
जश्न मनाते
मैंने देखा
शोहदों
और
सितारों को
जश्न मनाते
मैंने देखा
उगते पुच्छल
तारों को
जश्न मनाते
नहीं है देखा
सूखे मूल
कगारों को
तूफानों से
बची थी कश्ती
तूफानों से
बची थी हस्ती
क्यों करते हो
इतनी मस्ती?
आज, परिंदे
उड़ नहीं सकते
कैसी-कैसी
बातें हो गईं
मिटा दिए हस्ती
मिट्टी में बस्ती
बंजारों की हो
गई।
-हंस नाथ यादव
 
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एक घंटा पहले

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