आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

या तो उसको सच बता दो

                
                                                         
                            या तो सच उसको बता दो, या खामोश रहो तुम।
                                                                 
                            
या तो उससे मिल लो तुम,या फिर दूर रहो तुम।।
या तो सच उसको ----------------------।।

तुम कहते हो सभी से,हाले - दिल अपना ऐसे।
यह भी मालूम है तुमको, यहाँ पर लोग है कैसे।।
दूर कब दर्द किया है, इनसे कुछ नहीं कहो तुम।
या तो उससे मिल लो तुम, या फिर दूर रहो तुम।।
या तो सच उसको ----------------------।।

कसूर इनका क्या है, झगड़ते हो क्यों इनसे।
बिगाड़ा क्या है इन्होंने, लड़ते हो क्यों इनसे।।
जिसने गम तुमको दिया है, उसी को रुलाओ तुम।
या तो उससे मिल लो तुम, या फिर दूर रहो तुम।।
या तो सच उसको------------------।।

देखकर उसकी सूरत, निकलते हो उसके करीब से।
बात क्यों नहीं की उससे, अपने उस दोस्त- नसीब से।।
या तो यह नफरत मिटा दो,या बना तो दुश्मन तुम।
या तो उससे मिल लो तुम,या फिर दूर रहो तुम।।
या तो सच उसको--------------------।।

इससे अब होगा भी क्या, रोज जो लिखते हो खत।
बहाते तो आँसू यह तुम, छुपाकर उससे मोहब्बत।।
देखना क्या अब अंजाम, खत्म किस्सा करो तुम।
या तो उससे मिल लो तुम, या फिर दूर रहो तुम।।
या तो सच उसको ----------------------।।
-गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर