अकेले ही लड़ना होगा
अपनों से,समाज से,हालातों से,मजबूरियों से
अकेले ही संभलना होगा
गिरने से लड़खड़ाने से नाज़ुक दौर के झटकों से
अकेले ही चलना होगा
बिना डरे बिना गिरे बचकर राह में आए रोड़ों से
अकेले ही फिर जाना होगा
दुख-सुख का कर्ज़ चुका कर इस जहान से
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