सेवा भाव में वरदान मांगती है।
सुबह शाम भगवान मांगती है।
मीरा बनी है सब कुछ छोड़ कर।
उसके नाम का फरमान मांगती है।
पूजा और पति में तालमेल नहीं।
कब उसका समाधान मांगती है।
दिन भर पाठ पूजा में मसरुफ।
रात में पति की दुकान मांगती है।
पति-परमेसर अलग अलग हैं।
दोनो में जमीं आसमान मांगती है।
गौतम बाबा का कहा सच हुआ।
अहिल्या का पाषाण मांगती है।
जो है उसको समझा नहीं कभी।
जो नहीं उसका गुणगान मांगती है।
इनमें समझौता होगा कैसे सोहल।
सब में सदा घमासान मांगती है।
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