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गम भाई के जाने का

                
                                                         
                            लो फिर आने वाली है दिवाली, पर वो जोश दिल में नही है।
                                                                 
                            
दीये तो जलेंगे बहुत, पर मन में
रोशनी नहीं है।
घर में होंगे सब लोग, पर होठों पर वो खुशी नहीं है।
तमाम लोग है अबकी दिवाली, बस एक भाई नहीं है।
वो हर साल दिवाली पर कुछ नया लाने को कहता था।
सामानों से सजी है आज घर, पर आज मेरा भाई नहीं है।
अबकी दिवाली रॉकेट छोड़ने की इम्तिहान करा दूँगा मैं।
शर्त इतनी है कि रॉकेट की ऊंचाई भाई तक पहुँच जाए।
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37 मिनट पहले

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