इनके कृतित्व से बढ़ा, भारत का सम्मान॥
भारत का सम्मान, किया विज्ञान उजागर।
कावेरी के तीर, बाँध कृष्णराज सागर॥
कह 'गोकुल' कविराय, किया दूर देश का तम।
अभियंता सिरमौर, नमो नित्य मोक्षगुंडम॥१॥
बाँधे सागर नीर धर, कृष्णराज सुख-धाम।
सूखा सब भागे तुरत, सिद्ध किए सब काम॥
सिद्ध किए सब काम, नहर घर-घर पहुँचाई।
हरियाली चहुँ ओर, खेत-खलिहान सुहाई॥
कह 'गोकुल' कविराय, दूर किया देख काँगर।
जल-प्रबंध कर भव्य, देशभर बाँधे सागर॥२॥
जीवन पावन कर्ममय, दीन्हो दिव्य प्रकाश।
भारत-भूषण रत्न बन, किया तिमिर का नाश॥
किया तिमिर का नाश, नीति-निष्ठा अपनाई।
अनुशासन की शक्ति, सकल दुनिया को भाई॥
कह 'गोकुल' कविराय, सदा उनको करें नमन।
अभियंता-दिन आज, धन्य है उनका जीवन॥३॥
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