जागे वही अलार्म से , जगना चाहे जोय ।
शिक्षक उसे पढाय दे ,पढ़ना चाहे सोय ।।
पढ़ना चाहे सोय, तन, मन लगन हो जिसमें।
बुद्धिमान वह होय , मेहनत धीरज तिसमें।।
शिक्षक की सुनते नहीं , आपस करते बात।
सचलभाष के कारणे ,जीवन छात्र नशात।।
-- गोपी नाथ कृष्ण
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