कविता का सार सुन, भाव व्यवहार सुन,
हिय की पुकार सुन, करे जो प्रहार सुन।
करूणा का वार सुन, और कहूँ प्यार सुन,
कष्ट का ये हार सुन, शौर्य पुष्प धार सुन।।
नवधा बहार सुन, छंद अलंकार सुन,
ज्ञान का भण्डार सुन, तुक का आधार सुन।
श्रोता ले उचार सुन, मंच की हुँकार सुन,
आचार विचार सुन, कवि का विचार सुन।।
-गोदाम्बरी नेगी ‘पुंडरीक’
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