हजारों वर्षों से इठलाती हूं मैं
मां भारती के साथ साथ
अब तो
विश्व के कोने कोने पर पहुंच कर
राज करती हूं मैं,
प्यार मोहब्बत करने वालों के कारण
राष्ट्र भाषा मातृभाषा का सौभाग्य पाकर ही
अपने को जीवंत और गौरांवित पाती हूं मैं
मेरे कारण ही हर हिन्दुस्तानी
सुन्दर शब्दों के गहनों से संजोकर
अपने मन के भावों विचारों को
प्रस्तुत कर अपने पर इठलाता इतराता है
हां ..मैं हिन्दी हूं
करोड़ों की ज़बान पे बेख़ौफ़
राज करती हूं मैं..
हां .. हिन्दी हूं मैं..
हिन्दुस्तान की कोख से पनपी
हां .. हिन्दी हूं मैं..
मेरा सम्मान ही हर बच्चे का मान होगा
मेरा मान ही सबका स्वाभिमान होगा।
-- गीता शर्मा सूद
गीता "मुस्कान"
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