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अगली दफा

                
                                                         
                            जाओ, नहीं था मिलना नसीब में, कोई बात नहीं,
                                                                 
                            
फिर कोशिश करेंगे, अगली दफा जन्म लेंगे फिर वहीं।
शायद वही फिर गाँव हो, उस पेड़ की फिर छाँव हो,
शायद वही फिर रूप हो, बसंत की फिर धूप हो,
दुआ बस इतनी करूँगा, कि तुम छोड़ जाना फिर नहीं।
.................मै जन्म लूंगा फ़िर वहीं
वही कच्ची पगडंडी हो, जहाँ हम चले थे कभी,
वहीं से शुरू करेंगे, जहाँ रुके हैं अभी।
नदी का वो किनारा हो, हवाओं में वही नमी हो,
सब कुछ पूरा हो वहाँ, बस 'बिछड़ने' की कमी हो।
इस जनम की बेबसी, उस जनम में न आए,
हम मिलें ऐसे कि फिर, कोई जुदा कर न पाए।
न ज़माने की बंदिश हो, न रस्मों का पहरा हो,
इस बार तेरा रंग मुझ पर, और भी गहरा हो।
मैं वही किस्सा पुराना, फिर से दोहराऊँगा,
जो अधूरी रह गई थी, वो बात बताऊंगा।
तुम बस सुन लेना आँखों से, कुछ कहना नहीं,
वादा है इस बार मेरा, दूर होना फिर नहीं।
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6 महीने पहले

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