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डिजिटल राखी

                
                                                         
                            राखी का पावन पर्व आया,
                                                                 
                            
पर तुम मुझसे दूर हो भैया,
हाथों में धागा है, आँखों में नमी,
फिर भी मन में बस तुम्हारी ही खुशी।
इस बार भी कुछ ऐसा होगा,
स्क्रीन के उस पार मेरा भाई होगा,
रोली-अक्षत से तुम्हें सजाऊँगी,
वीडियो कॉल पर राखी बाँधूँगी।
तुम्हारे नाम से प्रभु के चरणों में
एक छोटी-सी प्रार्थना करूँगी—
ईश्वर तुम्हें सदा स्वस्थ रखे,
हर संकट से तुम्हारी रक्षा करे।
तुम्हारी आँखों में जो सपने हैं,
वे सब एक दिन पूरे हों,
जीवन की हर राह पर
खुशियों के दीप जले हों।
याद है न, घर आते ही
मेरी फरमाइश सबसे पहले आती है,
मेरी पसंद की दो Dairy Milk
भैया, आज भी मुझे बहुत भाती हैं।
छोटी-सी चीज़ में बड़ी खुशी मिलती है,
क्योंकि उसमें तुम्हारा प्यार जो मिलता है।
नोकझोंक हमारी रोज़ की है,
कभी रूठना, कभी मनाना है,
बड़ी बहन हूँ, हक़ भी है मेरा,
कभी डाँटना तो कभी प्यार जताना है।
दुनिया चाहे कितनी भी बड़ी हो,
भाई जैसा अपना कौन होता है?
दूरियों से रिश्ते कहाँ बदलते हैं,
सच्चा अपनापन तो दिल में होता है।
आज राखी भले ही
तुम्हारी कलाई पर स्वयं न बाँध पाऊँ,
पर अपने मन की दुआओं से
तुम्हें हर पल सुरक्षित पाऊँ।
राखी का धागा स्क्रीन के पार सही,
पर प्रेम की डोर अटूट रहेगी,
भाई-बहन के इस पावन रिश्ते की
मिठास सदा यूँ ही बनी रहेगी। 

- प्रथम कुमार यादव (इलाहाबाद विश्वविद्यालय स्नातक)
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3 घंटे पहले

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