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तू बैरागी बन।।

                
                                                         
                            *तू बैरागी बन*
                                                                 
                            

अपने मान का लोचन बन,
नए पथों का मोचन बन।

मोह के बंधन का तारण कर,
आत्मबोध का जागरण बन।

वैराग्य नहीं है पलायन,
वैराग्य है आत्म-रमण।

विषय-वासना का शमन कर,
तू निज स्वरूप का दर्शन बन।

काम, क्रोध, मद, लोभ का दमन कर,
तू संयम का नूतन सृजन बन।

शोक नहीं, संताप नहीं,
तू आनंद का अनुगुंजन बन।

गौरव गान गाथा का कुंजन बन,
भारत के यश का संवर्धन बन।

त्याग से ही प्राप्त है परमार्थ,
तू उसी परमार्थ का अर्चन बन।

तू बैरागी बन, तू योगी बन,
तू राष्ट्र के नवोत्थान का वंदन बन।
-गौरव कुमार तिवारी
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एक घंटा पहले

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