वो अब फिक्र नहीं करते।
टूटे दिल पर अब वो मरहम नहीं करते।
जो समेट लिया करते थे बिखरे हुए फूलों को
वो आज मोहब्बत के फूलों की भी कदर नहीं करते ।
वो अब फिक्र नहीं करते।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X