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गुनगुनाती ग़ज़ल उतर आई

                
                                                         
                            गुनगुनाती ग़ज़ल उतर आई,
                                                                 
                            
तेरे जैसे ग़ज़ल उतर आई।

चांद, खुश्बू,सबा धनक जैसी,
कैसी-कैसी ग़ज़ल उतर आई।

आज आये थे ख़्वाब में तुम सो,
ये गुलाबी ग़ज़ल उतर आई।

पिछले सावन में तुमको देखा था,
सांवली- सी ग़ज़ल उतर आई।

एक मिसरा निहां था यादों में,
इक पुरानी ग़ज़ल उतर आई।

रूप तेरा है भाव मेरे हैं,
यूॅं हमारी ग़ज़ल उतर आई।

बाम पर दिख गये थे तुम शब सो,
इक सुहानी ग़ज़ल उतर आई।

उड़ गया उसका ग़ैर क्या आंचल,
इक कुंवारी ग़ज़ल उतर आई।
-अनुराग मिश्र ग़ैर
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2 घंटे पहले

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