उलफ़त में रहना है एक बड़ी जंग,
न जाने किसने इसको दिल-ए-ख़्वाब कहा है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X