खुदा ने बख्शी हो सब्र की नेयमत जिसको
वो हर जख्म को भी दुआ समझता है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X