कितना और रुलाएगी वक्त ऐ गर्दिश ये तो बता
बोझ ये मेरे कांधों पर चलती फिरती लाश का है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X