बुरे वक्त में कौन है अपना कौन पराया
बुरे वक्त में होती है अपनों की पहचान
बुरा वक्त हो फिर भी मानो रब का तुम एहसान
बुरे वक्त में होती हैं अपने और पराए की पहचान
बुरे वक्त में जो न संभला वो इंसा हैं नादांन
बात तू मेरी मान बुरा वक्त भी होता है बलवान
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