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घर की जिम्मेदारीया

                
                                                         
                            अपने परिवार के लिए संघर्ष
                                                                 
                            
करता हुआ राही,
हर पल खुद को अकेला पाता है।
ना करे संघर्ष तो कौन
उसे अपना बताता है,
अपने परिवार की जिम्मेदारियों की
आस लिए फिरता है,
संघर्ष के साए में पानी की
जगह उम्मीदों की प्यास लिए फिरता है।
ना जाने इस संघर्षशील
जिंदगी में उसने अपने कितने
सपने मारे होंगे,
परिवार की खुशी के लिए
इस दुनिया के बदलते रंग जाने होंगे।
अभी उस पर घर की जिम्मेदारियां हैं,
उसने खुद के लिए कभी नहीं जिया।
ना करे श्रृंगार वो महंगी चीजों
और महंगे वस्त्रों का,
क्योंकि उसे पता है,
जिंदगी मेरी है मगर मुझे
मेरी जिम्मेदारी न्यारी है।
-विकास इवने
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9 घंटे पहले

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