आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कॉलेज से घर आते समय

                
                                                         
                            मां तुम कैसे समझ जाती है?
                                                                 
                            
कि मैं परेशान हूं
जब मैं कॉलेज से घर आती हूं
तो तुम्हारे इतने प्रश्नों को सुनकर
मैं अचंभे में पड़ जाती हूं
मैंने तुमसे सीखा
अपनी खुशी से पहले दुसरो को खुश रखना
मैंने नहीं देखा
तुम्हें अपने लिए कुछ लेते
तुम क्यों कुछ नहीं लेती अपने लिए
यह प्रश्न बार-बार आता
पर फिर यह सोच कर रूक जाता
कि तुम्हारी खुशी तो हम सब में है

कॉलेज से घर आते समय
मेरी मुलाकात उन तमाम
मां से होती है
जो सिर्फ अपने बच्चों के लिए संघर्ष करती है
कभी ट्रेन में, कभी बस में
कभी सब्जी मंडी में
और कभी मां मजबूरी करके
घर लौटते समय सफल गाड़ी में
तुम्हारा संघर्ष बहुत बड़ा है
तुम्हारा कर्तव्य बहुत बड़ा है
हमारी सीमा बहुत बड़ी है
तुम इस विस्मित आकाश की तरह हो
जहां हर किसी के लिए जगह है
तुम में दया, करुणा, ममता
सब एक साथ भरा है
अगर पूछा जाए सबसे सुंदर क्या है इस दुनिया में
तो हर कोई कहेगा मेरी मां
हमारी मां,हम सब की मां
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
50 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर