चलती है सांस कैसे यारा तुम्हारे बिन
जीता हूं रोज़ कैसे, हैरां तुम्हारे बिन
होते हैं बज्म में भी,तन्हा तुम्हारे बिन
है बे सबब ये दुनियां, जाना तुम्हारे बिन
हालात वो नहीं हैं, तेरा साथ भी नहीं
बाकी यही मुकद्दर, रोना तुम्हारे बिन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X