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तुम्हें क्यों कहें की क्या क्या सोचते है तेरे बारे मे

                
                                                         
                            ये सिकबे ये सिकायते,ये पल पल की तेरी बदलती ख्वाहिशो के बारे में क्या सोचे,
                                                                 
                            

तू है तो हर शिकायत माफ़ करता हु,
तू है तो तेरा हर अंजाम माफ़ करता हु,

जो संग बिताए किसी के साथ लम्हें,
उनको नज़र अंदाज़ करता हूं,
जो बीती रातें ,उसके साथ तेरी मुलाकाते,
उनको भी माफ करता हूं,

क्या सोचूं तेरे बारे में , कहां तक सोचूं तेरे बारे में,
तू है तो सब कुछ अच्छा है,
तू है तो सब कुछ उम्दा है,

तेरी नज़रों के नज़राने जब जब देखे तो
तेरी बेबसी याद आती रही,
कभी सोचा की , कि सोचे तेरे बारे में ,
फिर याद आया की क्या सोचूं तेरे बारे में,
ऐसा कोई लम्हा नही ,ऐसा कोई दिन न गया जो सोचा नहीं तेरे बारे में ,

अब सोचता हूं की क्या सोचे तेरे बारे मे
कहां तू मदहोश है अपने हुस्न ए जाम बनाने में,
कहां तक फिक्र करे तेरी ये झील सी आंखों की,
कुरबानिया की है हमने न जाने किस किस चीज़ की
तुम्हें क्यों कहें की क्या क्या सोचते है तेरे बारे मे
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4 घंटे पहले

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