“विचारों की शक्ति”
मन ही जीवन का दर्पण है, मन ही सुख का सार,
जैसे होंगे हमारे विचार, वैसा होगा संसार।
धन-दौलत, पद और सम्मान, सब क्षणिक उपहार,
सच्ची शांति वहीं मिले, जहाँ निर्मल हो विचार।
बारिश सब पर एक-सी बरसे, एक समान आकाश,
कोई उसमें दुख खोजे, कोई पाए उल्लास।
शिकायत, ईर्ष्या, नकारात्मकता, मन को करती क्षीण,
कृतज्ञता और संतोष भरें, जीवन में नव प्रवीण।
छोटे-छोटे शुभ चिंतन से, बदलें जीवन-राह,
विश्वास, धैर्य और करुणा से, खिल उठे हर चाह।
जिन्होंने पहले स्वयं बदला, बदली उनकी दृष्टि,
दृष्टि बदली तो कर्म बदले, और बदली सृष्टि।
मन ही शक्ति, मन ही पूजा, मन ही सच्चा मित्र,
उज्ज्वल विचारों से ही बनता, जीवन सुंदर चित्र।
- शिव राय पुरी
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