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मंज़िल दूर सही मगर, कदम बढ़ते रहें

                
                                                         
                            “एक विश्वास”
                                                                 
                            

हार न मानो जीवन में, रखो संयम का साथ।
मुश्किल राहों से ही,मिलता है विश्वास।

गिरना कोई कमजोरी नहीं, उठना ही है जीत,
हिम्मत से जो बढ़े कदम, पाता है नवनीत।

तूफ़ानों से डरना नहीं, मंज़िल मिलेगी ज़रूर,
धैर्य और मेहनत से ही, होता है नूर।

हर असफलता सिखाती है, आगे बढ़ने का ढंग,
अनुभव ही खिलता है, सफलता का रंग।

हार मानना सबसे बड़ी, कमजोरी कहलाए,
कोशिश करने वाला ही, मंज़िल तक ले जाए।

सब्र करो और मेहनत से, जीवन को सजाओ,
गिरकर भी उठते रहो, उम्मीद सदा जगाओ।

कठिनाइयाँ आएँ चाहे, मत खोना विश्वास,
संघर्ष ही देता है, जीवन को प्रकाश।

हार नहीं, प्रयास ही है, असली पहचान,
जो डटे हैं राहों पर, वही पाते सम्मान।

मंज़िल दूर सही मगर, कदम बढ़ते रहें,
जीत उसी की होती है, जो हार न मानें।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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