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युवाओं, होश में आओ...

                
                                                         
                            बापू जैसा साहस लाओ,और नेताजी की वो ललकार
                                                                 
                            
भगत सिंह सा जोश भरो,मिलेंगे तुमको सब अधिकार

गाँधी, सुभाष,और नेहरू बनना,सबके बस की बात नहीं
छिप छिपकर क्रांति रचना,क्या देश के साथ मज़ाक नहीं

सोशल मीडिया पर आकर,जो इंकलाबी ख़ुद को कहते हैं
वो धूप की तपिश से बचकर,बंद घरों में रहते हैं

देश के हालात देखो,कैसा मंज़र आया हैं
भीड़ तो बस भीड़ है और नेतृत्व भरमाया हैं

संविधान में लिखे अधिकार,बस बहसों में उलझे हैं
सुलझाने जो निकले थे,वो खुद ही उलझे हैं

युवाओं की सोच आज रील्स के व्यूज़ में सिमट गई
देश बदलने की वो आग, लाइक्स की चाह में बंट गई

इतिहास की किताबों से अब बस्ता छूट गया
व्हाट्सएप की यूनिवर्सिटी से सच का गला घुट गया

नफरत के कीबोर्ड से,जो जंग रोज़ लड़ते हैं
पूछो ज़रा उनसे,वो देश के लिए क्या करते हैं

सस्ती सी सनसनी को जो क्रांति मान बैठे हैं
वो रेत के घरौंदों को,चट्टान मान बैठे हैं

देश के युवाओं अब तो होश में आओ तुम
खोखली डिबेटो से,बाहर निकलकर आओ तुम

क्रांति लहू मांगती है,समर्पण और त्याग मांगती है,
यह डिजिटल की दुनिया बस,वक़्त ख़राब करती हैं

अगर बनना है भगत सिंह,तो ज़मीन पर आना होगा,
जात-पात और मज़हब से ऊपर उठकर दिखाना होगा

सिर्फ स्टेटस लगा लेने से वतन बदला नहीं करते
जो वतन से मोहब्बत करते हैं,वो शोर किया नहीं करते

कायर की तरह छिप-छिपकर, मत करो पीठ पर वार
सिंहों की तरह सम्मुख आओ,मिलेगें तब सब अधिकार !
-महेश यादव
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3 महीने पहले

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