श्याही,श्री राम और धर्म का मर्म...
एक ज़ाहिल ने स्याही फेंकी,मुख पर हुआ निशान
ज्ञानी होता तो समझ लेता ,क्या हैं स्याही का मान
जिस स्याही से लिखा राम चरित्र,और लिखे वेद-पुराण
उस स्याही को फेंक के मूरख,तू क्यों करता अपमान
जिस स्याही से रचा गया,भारत का संविधान महान
लिखा गया था 'वंदे मातरम'और अमर राष्ट्र-गान
अंधकार को जो मिटा दे, वो चेतना की धारा हैं
जिसने श्याही को नीचा माना,उसने सत्य को नकारा हैं
ज्ञान-किरण की अवहेलना करके,तू कितना हैं नादान
पढ़ लेता तो समझ समझ लेता,स्याही का क्या हैं मान
श्री राम न्याय हैं, श्री राम धर्म हैं, समरसता के हैं प्रतीक,
प्रेम-भाव का आचरण देकर, चलना सिखाते मार्ग सटीक
सुबह-शाम जब जन-मन बोले, 'राम-राम' सहर्ष-सप्रेम
हृदय-हृदय में बस जाता है, शांति, भाइचारा और क्षेम
उसी नाम से हिंसा फैलाना,अधर्म का आह्वाहन हुआ
पढ़ लेता तो समझ समझ लेता,स्याही का क्या मान हुआ
श्री राम-नाम को ढाल बनाकर,जो भी नफ़रत बोता हैं
राम-भक्तों की आत्मा पर वो,गहरा घाव पिरोता हैं
हिंसा और तनाव फैलाकर, राम को ही बदनाम किया
भक्ति के पावन मंदिर में, हिंसा का विष-पान किया
निश्चित ही दण्ड मिलेगा,नरक में होगा तुम्हारा स्थान
पढ़ लेता तो समझ समझ लेता,स्याही का क्या हैं मान
एक ज़ाहिल ने स्याही फेंकी,मुख पर हुआ निशान
ज्ञानी होता तो समझ लेता ,क्या हैं स्याही का मान
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