नेहा बोरा के अदभुत साहस को कोटि-कोटि प्रणाम हैं
नेहा, मनीष और आमीन का ही तो क्रांति नाम हैं
सावित्री फुले का रूप लिए जो हक़ की अलख जगाती हैं
अन्याय के आगे पर्वत-सी जो सीना तान खड़ी हो जाती हैं
शीश नवाकर हम, दिल से दुआएँ देते हैं
तेरी पावन राहों में आशीर्वाद हज़ारों देते हैं
सत्य-अहिंसा की मशाल यह कभी न बुझने पाएगी
तेरी निष्ठा की पावनता इतिहास नया लिख जाएगी
आँखों में आक्रोश भरा हैं,दिल में छात्र-हितों की तड़प हैं
नस-नस में इंकलाब दौड़ता, बोली में शेरों-सी गरज़ हैं
तेरे इस पावन अनशन को मेरा भी पूर्ण समर्थन हैं
तेरे हर एक कदम के आगे यह स्वाभिमान अर्पण हैं
लहू की हर एक बूँद से तेरे हौसले को बढ़ाऊँगा
पंक्तियाँ लिख लिखकर जन समर्थन जुटाऊँगा
नेहा, मनीष और आमीन तुम,देश की शान हो
ज़ुलुम के आगे तुम न झुके,तुम भारत का अभिमान हो
प्रणाम तुम्हारे जज़्बे को,और प्रणाम स्वाभिमान को
याद रखेगी यह दुनियाँ,इस अहिंसा के संग्राम कोक
-.महेश यादव
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