चीन पर भारत क्यों चुप है
यह प्रश्न बड़ा विकराल है
देश मांगता हैं,सीधा उत्तर
यह मातृभूमि का सवाल हैं
सीमा पर छाया हैं जो
वो चीन का काला साया हैं
पीठ पर खंज़र,जो हरदम घोंपे
वो ड्रैगन फिर से,आया हैं
तिब्बत की चीखें भूल गए हम
या भूल गए सन 'बासठ' को
अक्साई चिन की उस माटी पर
लगे हुए उस आहत को।
तिब्बत को उसने,पहले निगला
फिर हम पर प्रहार किया
हमारी पावन माटी को
फिर उसने,अपने नाम किया
चीन पर सत्ता की चुप्पी
यह प्रश्न बड़ा विकराल है,
देश मांगता सीधा उत्तर
यह जनता का सवाल हैं
धोखे की बुनियाद पर
चीन चाले चलता है
जहरीला यह सॉँप हैं
समय समय पर डसता हैं
लद्दाख और अरुणाचल पर
वो आँखे लाल दिखाता हैं
भारत की पावन भूमि पर
हक़ अपना जतलाता है।
मौन खड़ा हैं क्यों हिमालय
पूछ रहा हर भारत वासी
चीन के हिंसक कृत्यों पर
जन जन में हैं बहुत उदासी
गलवान के उन शहीदों का
लहू पुकारता प्रतिशोध को
अंकुश लगाओ अब तो डटकर
ड्रैगन के इस क्रोध को।
मातृभूमि की रक्षा खातिर
निर्भय होकर डट जाओ
कायरता की चादर त्यागो
सिंह की भाति झपट जाओ।
नेताओँ को साहस की अब
अग्नि परीक्षा देनी होगी
चीन के हर एक ज़ुल्म पर
अब उसकी वलि लेनी होगी।
गाँधी जी के सत्य मार्ग पर
सच्चाई से हमें चलना होगा
चीन के असली चेहरे को अब
दुनियाँ के सामने रखना होगा।
मौन तोड़ना होगा अब
वीरों की इस धरती को
दिखलाना होगा दुनिया को
भारत की अडिग शक्ति को।
उठो हाक़िम अब मौन तोड़ो
यह हैं वक़्त की पुकार हैं
सबक सिखाओ चीन को
जो धोख़े से करता वार हैं
आतंकवाद की पौध को
यह खाद और पानी देता
हमारे दुश्मन पाक को यह
घातक हथियार हैं देता
क्या हुआ उस सौगंध का
जो संसद में हमने खाई थी
चीन से भूमि बापिस लेंगे
सन बासठ शपथ दोहराई थी
सत्य बोलें और अडिग रहें
भारत का यह संकल्प हो
चीन अगर फैके ईंट
ज़वाब में पत्थर विकल्प हो
भारत के उन वीरों का
बलिदान नहीं अब भूलों तुम
जो हाथ उठाए अब हम पर
गर्दन उसकी छू लो तुम
जय हिंद की हुंकार, भरो ऐसे
गूंज जाये फिर,अम्बर सारा
तोड़ो चुप्पी,और चीन से छीनो
मातृभूमि का हिस्सा सारा
राष्ट्र हित में अब चुप्पी तोड़ो
यह प्रश्न बड़ा विकराल हैं
कब तक चीन पर चुप रहोगे
यह मेरा भी सवाल हैं ?
-महेश यादव
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