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मर्द हो तो वलात्कर न करना ...

                
                                                         
                            जहाँ न नारी का सम्मान
                                                                 
                            
कैसे बसेंगे वहाँ भगवान?

नारी बिन यह जग अधूरा
नारी बिन तो रब भी अधूरा

नारी से ही मुमकिन हैं
खुशियों भरा सांझ-सवेरा

खुशियों का अंबार हैं नारी
ममता का दुलार हैं नारी

बहन का पावन प्यार है नारी
प्रेम से भरा संसार हैं नारी

कुछ मर्दों की सोच बुरी हैं
कल भी बुरी थी,आज बुरी हैं

सीता, द्रौपदी और निर्भया
हैवानियत की भेंट चढ़ी हैं

सतयुग हो या त्रेता युग
द्वापर हो या कलयुग में

नारी के दमन की चीखें
गूंज रही हैं हर एक युग में

हत्या,बलात्कार,चीरहरण
हर पल होता नारी का शोषण

दुःशासन का ओढ़ के चोला
गली-गली घूम रहे रावण

बदलो सोच और बनो उपकारी
सच्चे मर्द बचाते दामन

न बेचारी न तारण की अधिकारी
नारी तो हैं गंगा सी पावन

पुरुषों का अभिमान है नारी
हर घर का सम्मान है नारी

यह तो है जगत कल्याणी
ज़मीं और आसमान है नारी

भारत माँ की जय हम करते
नारी की हम पूजा करते

नारी की महिमा निराली
दुर्गा, काली, शेरावाली

नया वक़्त हैं ,नया हैं ज़माना
नारी संग अब कदम बढ़ाना

सुन लो अब दुर्व्यवहार न करना
मर्द हो तो बलात्कार न करना

जहाँ न होगा नारी का सम्मान
कदापि न बसेंगे वहाँ भगवान
-महेश यादव
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एक महीने पहले

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